Sunday, May 28, 2017

कुछ भार ऐसे भी

उतारे न उतरें,
गिराए न गिरें.
इन्हें बस लादे चलना है कैसे भी.
कुछ भार ऐसे भी.

दूसरों पर लादकर देखा हमने -
वह दबे पर हम न उबरे.
वो क्या उठा पाते भार बेगाना,
अपने भार से लदे थे वैसे ही.

एक मुद्दत से उठाने की आदत है,
न हो, तब भी उठाना है.
चलना ज़रूरी है देखकर आगे,
मुड़ने से भारी हों,
कुछ भार ऐसे भी.

दहाड़ो, चिंघाड़ो, रो पड़ो,
चल देखो सर के बल,
बंटाए न बटें, हटाए न हटें,
गर्दन के ऊपर टिके
कुछ भार ऐसे भी.

उतारे न उतरें,
गिराए न गिरें -
कुछ भार ऐसे भी.

1 comment:

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