Sunday, July 12, 2015

How much will you live? कितना जियोगे?

कितना जियोगे?

मथ डालूँगा समुद्र के साथ साथ
आकाश भी,
राहु-केतु  को न पीने दूँगा
एक भी बूँद
अमृत की.
निचोड़ कर सबकुछ
उतारूँगा तुम्हारे गले.

देवताओ, कितना पियोगे?

छल से, तप से,
जितने वर पाए हैं
उनसे सहस्र बार
ले जाओ
वर मुझसे.
युग जी लो,
युगांत जी लो,
सृष्टि भर जी लो,
उसके परे जी लो.

देवताओ,
कितना जियोगे?