Saturday, January 6, 2018

A quicker mode of travel coming soon? DT you said??

Drone based travel, call it DT for short, is coming a bit too soon, it appears.

Not really, because the technology might get ready to fly you, in a small cube, from floor to floor or from home to office, but the control systems may not be in place. Or, as it happened with many recent technologies, the tech would take the front seat and governments, law-makers and businesses would try to catch up.

Even if DT is not available to you and me, at least ambulances may run on it, people could be picked from disaster scenes and police may be able to chase offenders better. There are many situations in which DT would possibly be able to save lives and help the society in other ways. And think of flying in the sky for adventure and entertainment! At the same time, the possibility of misuse of this tech is very scary.

I am looking at not investing in a cube or pod even if it is offered to me tomorrow, as it would be very expensive in the beginning, but I'd sure try an air taxi at the first opportunity. We are hearing that Uber or Texla or Google or some other firm would soon start such a service in some parts of the globe. In India, perhaps before we come to hire or own these air travel vehicle, the entire production would be used by Ministers and other VIPs, with red beacon lights on top!

Drone travel and transport

Sorry for that sarcasm, borne mostly out of envy, and let's come back to technology.

DT, when it comes to happen, will be more disruptive than driver-less cars. In fact, they might disrupt the progression of such cars , which themselves are threatening to disrupt the present vehicle industry. If supporting technologies develop as fast, technological solutions to possible mid-air collisions, bird-hits, crash-lands, weather-related problems, etc may come by equally fast. Perhaps grounded issues such as pollution and privacy-theft will be more difficult to handle - and who cares.

One thing is certain; for the first few years of DT, don't expect too much jam or drone pods lining up in the sky to land on an office compound.

Ten years? Five? How much time you'd like to wait till DT becomes a commonplace mode of travel?

Tuesday, December 26, 2017

बड़ा ज्ञान, अगले साल के लिए

पिछले साल को क़रीब-क़रीब पीछे छोड़ दिया है हमने. मैं तो एक साल ज़्यादा ग्यानी हो गया, या कहिये, कुछ बड़ा ही ज्ञान मिल गया मुझे. सोचा, आप लोगों से शेयर कर लिया जाए. 

इंसान फ़ितरत से ऊल-जलूल सोचता रहता है, में भी सोचता रहता हूँ. अंत में हर बात का उत्तर मिल जाता है, लेकिन कुछ यक्ष प्रश्न हैं जो अन-सुलझे रह जाते हैं हर बार. 

तो इस बार जब में सीरियस सा मुंह बनाकर बैठा था और कुछ सोच रहा था तो अपने एक साथी का करीब 10-11 वर्ष का बेटा जो शायद मेरी परेशानी भाँप रहा था, पास आ गया. "आप कुछ सोच रहे हैं ना ?" उसने पूछा. लगा, छोटे बच्चे इनोसेंट होते हैं और एक तरह से भगवान का रूप होते हैं, और इस भगवान ने तो मेरे मन की बात भी जान ली है. मेरे कठिन सवालों का हल भगवान के अलावा कौन दे सकता था, सो मैंने हाँ कर दी.  

"पहले प्रॉमिस करिये कि आप मुझे अभी चॉकलेट लाकर देंगे?" 

मेरे हाँ करने पर उसने मेरे प्रश्न को हल करने की मुद्रा में मेरी तरफ़ देखा. मुझे लगा, भगवान-स्वरुप इस बच्चे ने इस साल के जाते जाते मुझे सर्व-ज्ञानी बना देना है. (मन ही मन मैंने यह भी सोचना शुरू कर दिया कि अगर में इस ज्ञान को लेकर कल से ही प्रवचन करना शुरू कर दूँ तो दुनिया का सबसे बड़ा गॉड-मैन बन जाऊँगा. लेकिन मैंने जल्दी ही खुद पर कंट्रोल कर लिया, धर्मपत्नी जी के इस सर्वदा-प्रस्तुत सर्टिफिकेट को याद कर के कि 'तुम जिंदगी भर कुछ नहीं कर सकते'.) 

तो मैंने अपने प्रश्न पूछ डाले:

"बेटा, ये बताओ कि भगवान कौन है और यह भी कि जीवन के बाद क्या है?"

बच्चे  ने मुस्कराते हुए (मुस्कराता हुआ ये बच्चा तो साक्षात् कृष्ण था, जो मुझ अर्जुन के सवालों का जवाब देने सामने खड़ा था) कहा, दो उत्तरों की लिए 'इतनी बड़ी' (बालिश्त भर) दो चॉकलेट देनी होंगी. 

मेरे सिर हिलाने की देर थी कि बालक वहाँ से गायब हो गया (कृष्ण की तरह!)

दो मिनट के बाद छोटे जी मेरे सामने अपने पिता का लैपटॉप खोले हुए खड़े थे जिसमें मेरे पहले प्रश्न का उत्तर कुछ इस तरह हल हुआ था:

Who is God?
About 61,50,00,000 results (0.78 seconds)

मुझे आश्वस्त पाकर साहब ने अगला टैब खोला, जिसमें गूगल का एक और सर्च पेज खुला था और लिखा था,

What is after life?
About 12,40,00,000 results (0.84 seconds)

लगता है, इस साल से ऐसे (वाहियात) प्रश्न पूछने बंद करने पड़ेंगे जिनके करोड़ों हल पहले से हैं लेकिन उत्तर देने के लिए 'इतनी बड़ी' चॉकलेट खिलानी पड़ती है. 

Friday, November 17, 2017

नेति नेति कुछ ऐसे भी

जो था -
न यह था,
न वह था.
क्योंकि कुछ नहीं था,
समय भी नहीं.

 जो है -
न यह है,
न वह है,
न यह-वह होगा,
समय भी नहीं.

सृष्टि के कैमरे में
इस क्षण
जो कतरा कैद हुआ,
उसमें से
यह मायावी क्षण
हटा कर देखा.

जो बचा,
शायद
वह है,
वह था,
वह होगा.